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भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने रचा इतिहास: विक्रम-1 ने पहली उड़ान में 6 पेलोड सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचाए

श्रीहरिकोटा | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी डेस्क

भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने शनिवार को एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली। हैदराबाद स्थित निजी स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) के पहले ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ ने अपनी पहली ही उड़ान में सफलता हासिल करते हुए छह पेलोड को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया।

इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां निजी कंपनियां स्वतंत्र रूप से ऑर्बिटल रॉकेट विकसित कर अंतरिक्ष में पेलोड भेजने की क्षमता हासिल कर चुकी हैं। मिशन को ‘आगमन (Mission Aagaman)’ नाम दिया गया था।

पहली उड़ान में ही मिला मिशन को शत-प्रतिशत सफल परिणाम

विक्रम-1 का प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया। शुरुआती तकनीकी जांच के कारण लॉन्च में कुछ समय की देरी हुई, लेकिन सभी प्रणालियों के सामान्य होने के बाद रॉकेट ने सफल उड़ान भरी और निर्धारित समय में अपने सभी छह पेलोड को लगभग 450 किलोमीटर ऊंची कक्षा में स्थापित कर दिया।

अंतरिक्ष अभियानों में पहली उड़ान का सफल होना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में विक्रम-1 की यह उपलब्धि भारतीय निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए बड़ी तकनीकी सफलता मानी जा रही है।

क्या हैं ये 6 पेलोड?

मिशन के तहत छह विभिन्न पेलोड अंतरिक्ष में भेजे गए। इनमें भारतीय और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के प्रौद्योगिकी प्रदर्शन (Technology Demonstration) से जुड़े उपकरण और उपग्रह शामिल हैं। इनका उद्देश्य नई अंतरिक्ष तकनीकों का परीक्षण, संचार, डेटा संग्रह और भविष्य के व्यावसायिक मिशनों के लिए आवश्यक प्रणालियों का सत्यापन करना है।

क्यों खास है विक्रम-1?

विक्रम-1 केवल एक रॉकेट नहीं, बल्कि भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग की नई पहचान बनकर उभरा है।

इसकी प्रमुख विशेषताएं:

  • तीन-चरणीय ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल।
  • 3D-प्रिंटेड इंजन सहित आधुनिक प्रणोदन तकनीक का उपयोग।
  • छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों को कम लागत में अंतरिक्ष तक पहुंचाने की क्षमता।
  • व्यावसायिक (Commercial) लॉन्च सेवाओं के लिए विकसित स्वदेशी प्लेटफॉर्म।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रॉकेट वैश्विक स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा को मजबूत करेगा।

प्रधानमंत्री ने दी टीम को बधाई

मिशन की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को फोन कर बधाई दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं इस लॉन्च का सीधा प्रसारण देखा और यह उपलब्धि देश के युवाओं तथा नवाचार की शक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है।

भारत के स्पेस सेक्टर के लिए क्यों अहम है यह मिशन?

वर्ष 2020 में भारत सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद कई स्टार्टअप इस क्षेत्र में सक्रिय हुए। विक्रम-1 की सफलता इस नीति का अब तक का सबसे बड़ा परिणाम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत वैश्विक लॉन्च सेवाओं के बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकेगा। आने वाले वर्षों में छोटे उपग्रहों की मांग तेजी से बढ़ने की संभावना है और ऐसे में भारतीय निजी कंपनियों के लिए नए व्यावसायिक अवसर खुलेंगे।

आगे क्या?

स्काईरूट एयरोस्पेस ने संकेत दिए हैं कि विक्रम-1 की सफलता के बाद कंपनी और अधिक व्यावसायिक मिशनों की तैयारी करेगी। भविष्य में बड़े पेलोड, अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के उपग्रह और नई पीढ़ी के लॉन्च व्हीकल विकसित करने की दिशा में भी काम जारी रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गति बनी रही तो आने वाले दशक में भारत केवल सरकारी अंतरिक्ष अभियानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निजी अंतरिक्ष सेवाओं का भी वैश्विक केंद्र बन सकता है।