नई दिल्ली | विशेष संवाददाता
दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़े साजिश (Larger Conspiracy) मामले में आरोपी शरजील इमाम की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम कदम उठाया है। अदालत ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर उसका जवाब तलब किया है। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय करते हुए पुलिस को अपना पक्ष रखने का समय दिया गया।
ट्रायल कोर्ट के फैसले को दी है चुनौती
शरजील इमाम ने हाई कोर्ट में उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने 4 जुलाई को उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी। याचिका में कहा गया है कि मामले में कई वर्षों से आरोप तय करने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी है और ट्रायल में उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है। इसी आधार पर जमानत देने की मांग की गई है।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति प्रतीभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। अदालत ने पुलिस को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया और मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त के लिए निर्धारित की। फिलहाल हाई कोर्ट ने जमानत पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है।
मामला क्या है?
यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़ी कथित बड़ी साजिश के आरोपों से संबंधित है। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि शरजील इमाम इस कथित साजिश के प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं। उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज है।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है और अदालत में अपनी दलीलें रखता आया है। मामले की सुनवाई अभी जारी है और आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय आना बाकी है।
लंबी न्यायिक प्रक्रिया बना प्रमुख मुद्दा
जमानत याचिका में यह भी कहा गया कि गिरफ्तारी के कई वर्ष बाद भी मुकदमा आरोप तय करने के चरण से आगे नहीं बढ़ पाया है। बचाव पक्ष ने इसी आधार पर राहत की मांग की है। वहीं, अभियोजन पक्ष पहले भी अदालत में यह कहता रहा है कि मामला गंभीर प्रकृति का है और UAPA के तहत दर्ज आरोपों को देखते हुए जमानत का विरोध किया जाना चाहिए।
आगे क्या होगा?
अब दिल्ली पुलिस हाई कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करेगी। इसके बाद अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर यह तय करेगी कि शरजील इमाम को नियमित जमानत दी जाए या नहीं। फिलहाल हाई कोर्ट ने केवल पुलिस से जवाब मांगा है और मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है।


