नई दिल्ली/लखनऊ | विशेष संवाददाता
पर्यावरण कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के सत्याग्रह को अब समाजवादी पार्टी का खुला राजनीतिक समर्थन मिल गया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वांगचुक से फोन पर बातचीत कर उनका हालचाल जाना और उनके आंदोलन के प्रति समर्थन जताया। वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए अखिलेश ने उनसे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और अनशन समाप्त करने की अपील भी की।
अखिलेश यादव का यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब वांगचुक के आंदोलन को लेकर राजनीतिक समर्थन का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। इससे पहले समाजवादी पार्टी के सांसद प्रिया सरोज और पुष्पेंद्र सरोज प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर आंदोलन के प्रति समर्थन जता चुके थे।
पहले सांसदों को भेजा, फिर खुद किया फोन
समाजवादी पार्टी की ओर से आंदोलन के समर्थन में पहले युवा सांसदों को भेजा गया। इसके बाद अखिलेश यादव ने खुद सोनम वांगचुक से फोन पर बातचीत की। इस घटनाक्रम को केवल औपचारिक समर्थन के बजाय सपा की ओर से एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आंदोलन और मुद्दों की लड़ाई महत्वपूर्ण है, लेकिन स्वास्थ्य की रक्षा भी जरूरी है। उन्होंने वांगचुक से अनशन समाप्त कर स्वास्थ्य लाभ लेने का आग्रह किया।
प्रिया सरोज और पुष्पेंद्र सरोज पहुंचे थे प्रदर्शन स्थल
इससे पहले मछलीशहर से सपा सांसद प्रिया सरोज और कौशांबी से सांसद पुष्पेंद्र सरोज आंदोलन के समर्थन में पहुंचे थे। दोनों युवा सांसदों की मौजूदगी को सपा की ओर से आंदोलन के साथ राजनीतिक एकजुटता के संकेत के रूप में देखा गया।
प्रिया सरोज ने प्रदर्शनकारियों की मांगों के समर्थन में सरकार से उनकी आवाज सुनने की अपील की। सपा का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण आंदोलन और सत्याग्रह के जरिए उठाए जा रहे मुद्दों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
वांगचुक की सेहत को लेकर बढ़ी चिंता
लंबे समय से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लगातार भूख हड़ताल के कारण उनकी सेहत प्रभावित हुई है। इसी वजह से कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की ओर से उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की जा रही है।
अखिलेश यादव ने भी बातचीत के दौरान इसी पहलू पर जोर दिया और कहा कि आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए वांगचुक का स्वस्थ रहना जरूरी है।
विपक्षी समर्थन से बढ़ा आंदोलन का राजनीतिक दायरा
सोनम वांगचुक लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण, हिमालयी पारिस्थितिकी और लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। मौजूदा सत्याग्रह को विपक्षी नेताओं का समर्थन मिलने से यह आंदोलन अब सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श का भी हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।
सपा के खुले समर्थन के बाद यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि आने वाले दिनों में क्या अन्य विपक्षी दल भी इस आंदोलन के समर्थन में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
अखिलेश के कदम के सियासी मायने
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो अखिलेश यादव का यह कदम समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा सकता है। पार्टी उत्तर प्रदेश की राजनीति से आगे बढ़कर पर्यावरण, लोकतांत्रिक अधिकारों और जन आंदोलनों जैसे विषयों पर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।
युवा सांसदों को आंदोलन स्थल पर भेजना और इसके बाद स्वयं सोनम वांगचुक से फोन पर बातचीत करना इस रणनीति का संकेत माना जा रहा है।
फिलहाल सोनम वांगचुक के आंदोलन और उनकी सेहत पर सभी की नजरें टिकी हैं। सपा के खुले समर्थन के बाद इस आंदोलन का राजनीतिक दायरा और बढ़ने की संभावना है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और विपक्षी दलों की रणनीति इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकती है।


