पुणे | 6 जुलाई 2026
पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब पुलिस की जांच का केंद्र डिजिटल साक्ष्य और कथित साजिश की तैयारी बन गई है। जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपियों ने घटना से पहले इंटरनेट पर हत्या के तरीके खोजे, कई स्थानों की रेकी की और पूरी योजना को अंजाम देने से पहले उसकी तैयारी भी की थी। इन दावों की पुष्टि के लिए पुलिस डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है।
डिजिटल फोरेंसिक से जांच को मिली नई दिशा
जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस का कहना है कि घटना से पहले इंटरनेट पर कथित तौर पर हत्या के विभिन्न तरीकों से जुड़ी खोज (सर्च हिस्ट्री) की गई थी। इसके अलावा दोनों आरोपियों के बीच लंबे समय तक हुई बातचीत, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल संचार भी जांच का हिस्सा हैं।
लोहागढ़ किले पर दोबारा पहुंची जांच टीम
मामले की जांच के दौरान पुलिस आरोपियों को पुणे के लोहागढ़ किले भी लेकर गई, जहां कथित तौर पर घटना का पुनर्निर्माण (Crime Scene Reconstruction) कराया गया। अधिकारियों का उद्देश्य यह समझना था कि घटना वाले दिन दोनों आरोपी किस रास्ते से पहुंचे, उनकी गतिविधियां क्या थीं और घटनाक्रम किस क्रम में घटित हुआ। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई।
पॉलीग्राफ टेस्ट की तैयारी
जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस ने मुख्य आरोपी सिया गोयल का पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट कराने की प्रक्रिया भी शुरू की है। रिपोर्टों के अनुसार, सिया ने इस जांच के लिए सहमति दे दी है। हालांकि, पॉलीग्राफ टेस्ट को अदालत में अंतिम साक्ष्य नहीं माना जाता, लेकिन जांच एजेंसियों के लिए यह नए सुराग जुटाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है।
हत्या की साजिश की जांच जारी
पुलिस का दावा है कि अब तक जुटाए गए साक्ष्य यह संकेत देते हैं कि घटना अचानक नहीं हुई, बल्कि इसकी पहले से योजना बनाई गई थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित साजिश में और कोई व्यक्ति शामिल था या नहीं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल लोकेशन और गवाहों के बयानों को आपस में जोड़कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां तैयार की जा रही हैं।
न्यायिक प्रक्रिया जारी
फिलहाल मामले के दोनों मुख्य आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और पुलिस अदालत की निगरानी में आगे की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष सभी वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों की जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। जब तक अदालत दोष सिद्ध नहीं करती, तब तक सभी आरोपी कानून की नजर में आरोपित हैं, दोषी नहीं।


