नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तेल कंपनियों ने डीजल के दाम में 91 पैसे और पेट्रोल में 87 पैसे प्रति लीटर तक की वृद्धि कर दी है, जिससे आम आदमी की चिंता और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई पर मंडरा रहे खतरे का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी तरह का संकट वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला देता है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे पेट्रोल-डीजल और परिवहन लागत पर दिखाई देता है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अगर तनाव और बढ़ा, तो ईंधन की कीमतों में और इजाफा हो सकता है।
बढ़ती कीमतों का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सब्जियों, राशन और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है। आर्थिक विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहा, तो महंगाई दर पर बड़ा असर पड़ सकता है।
विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि जनता पहले ही महंगाई से परेशान है और अब ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी ने स्थिति और मुश्किल बना दी है। वहीं सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण यह दबाव बना है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।


