कोलकाता: पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल फलता विधानसभा सीट पर मतदान से ठीक पहले बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान ने अचानक चुनावी मैदान से पीछे हटने का फैसला लेकर पूरे बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस फैसले ने न सिर्फ पार्टी रणनीति को झटका दिया है, बल्कि पुनर्मतदान से पहले सियासी समीकरण भी बदल दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जहांगीर खान पर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक और कानूनी दबाव लगातार बढ़ रहा था। फलता सीट पहले से ही संवेदनशील मानी जा रही थी, जहां बूथ कैप्चरिंग, हिंसा और चुनावी अनियमितताओं के आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया था। इसी बीच उम्मीदवार के अचानक हटने ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
TMC ने आरोप लगाया है कि विपक्षी दबाव और प्रशासनिक कार्रवाई के कारण यह स्थिति पैदा हुई। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले उम्मीदवार को घेरने की कोशिश की गई ताकि फलता सीट पर राजनीतिक फायदा उठाया जा सके। वहीं बीजेपी इस पूरे मामले को TMC की “आंतरिक लड़ाई और डर” का परिणाम बता रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फलता सीट अब केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं रह गई है, बल्कि यह बंगाल की बदलती राजनीति का प्रतीक बन चुकी है। अगर पुनर्मतदान में विपक्ष मजबूत प्रदर्शन करता है, तो यह ममता बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश माना जाएगा। वहीं TMC इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा की लड़ाई मानकर पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है।


