भारतीय रेलवे जल्द ही अपने चार दशक पुराने यात्री आरक्षण सिस्टम को पूरी तरह नई तकनीक से अपग्रेड करने जा रहा है। रेलवे मंत्रालय का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य यात्रियों को पहले से अधिक तेज, आसान और भरोसेमंद टिकट बुकिंग सुविधा उपलब्ध कराना है।
रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने हाल ही में रेल भवन में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए कि अपग्रेडेशन के दौरान यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। रेलवे के अनुसार मौजूदा रिजर्वेशन सिस्टम वर्ष 1986 में शुरू हुआ था और पिछले 40 वर्षों में इसमें कई छोटे तकनीकी बदलाव किए गए, लेकिन अब इसे आधुनिक जरूरतों के अनुसार पूरी तरह नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है।
ऑनलाइन टिकट बुकिंग का बढ़ा दायरा
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2002 में इंटरनेट आधारित टिकट बुकिंग की शुरुआत के बाद से यात्रियों का रुझान तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ा है। वर्तमान में भारतीय रेलवे की कुल टिकट बुकिंग मांग का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा ऑनलाइन माध्यमों से पूरा हो रहा है। इससे रेलवे काउंटरों पर निर्भरता भी काफी कम हुई है।
RailOne ऐप बना यात्रियों की पहली पसंद
रेल मंत्रालय ने बताया कि पिछले वर्ष जुलाई में लॉन्च किया गया RailOne ऐप यात्रियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। एक वर्ष से कम समय में इसे 3.5 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।
यह ऐप केवल टिकट बुकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्रेन की लाइव जानकारी, यात्रा संबंधी सेवाएं और शिकायत दर्ज कराने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराता है। मंत्रालय के अनुसार, इस ऐप के जरिए प्रतिदिन करीब 9.29 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं। इनमें लगभग 7.2 लाख अनारक्षित टिकट और 2.09 लाख आरक्षित टिकट शामिल हैं।
नए सिस्टम से क्या बदलेगा?
रेल मंत्रालय का मानना है कि नए आरक्षण सिस्टम के लागू होने के बाद यात्रियों को टिकट बुकिंग के दौरान कम तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ेगा। साथ ही सर्वर क्षमता बढ़ने से एक साथ बड़ी संख्या में लोग बिना रुकावट टिकट बुक कर सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारतीय रेलवे के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। बढ़ती ऑनलाइन मांग और यात्रियों की सुविधाओं को देखते हुए रेलवे अब अपने तकनीकी ढांचे को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में जुटा है।


