नई दिल्ली | लाइफस्टाइल डेस्क
आधुनिक दौर में रिश्तों की जटिलताओं के बीच एक मजबूत और स्थायी संबंध बनाए रखना चुनौती बनता जा रहा है। इसी बीच प्रसिद्ध कथावाचक और मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी ने युवाओं को एक अहम सलाह दी है, जो आज के रिलेशनशिप डायनामिक्स को समझने में मदद करती है।
हाल ही में एक बातचीत के दौरान उन्होंने रिश्तों की मजबूती से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू उजागर किया—लड़कियों की ‘लव लैंग्वेज’ यानी प्यार की अभिव्यक्ति का तरीका।
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रिश्तों में केवल प्यार नहीं, अभिव्यक्ति भी जरूरी
जया किशोरी के अनुसार, किसी भी रिश्ते में सिर्फ प्यार होना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उस प्यार को व्यक्त करना भी उतना ही आवश्यक है।
उनका कहना है कि कई बार लोग अपने भावनाओं को मन में ही रखते हैं और मान लेते हैं कि सामने वाला समझ जाएगा, जबकि वास्तविकता इससे अलग होती है।
उनके मुताबिक,
लड़कियों के लिए “एक्सप्रेसिवनेस” यानी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करना ही असली लव लैंग्वेज है। 
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छोटी-छोटी बातें बनाती हैं बड़ा फर्क
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रिश्तों में बड़े वादों से ज्यादा महत्व छोटी-छोटी बातों और शब्दों का होता है।
जब कोई व्यक्ति अपने साथी को प्यार भरे शब्दों से खास महसूस कराता है, तो यह रिश्ते में विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करता है।
भले ही “चांद-तारे तोड़ लाने” जैसी बातें वास्तविक न हों, लेकिन उनके पीछे छिपी भावना ही असली मायने रखती है।
लड़कियों की सोच: भावनाओं की समझ, दिखावे की नहीं
जया किशोरी ने यह भी कहा कि लड़कियां भावनात्मक रूप से काफी समझदार होती हैं। उन्हें यह भली-भांति पता होता है कि कौन-सी बातें वास्तविक हैं और कौन-सी सिर्फ कहने भर की।
फिर भी, वे इन शब्दों और भावनाओं को महत्व देती हैं क्योंकि इससे उन्हें यह एहसास होता है कि उनका साथी उन्हें प्राथमिकता देता है।
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रिश्तों की मजबूती का असली मंत्र
जया किशोरी की सलाह का सार यह है कि:
•भावनाओं को छिपाने के बजाय व्यक्त करें
•संवाद को रिश्ते की नींव बनाएं
•छोटे-छोटे प्रयासों को नजरअंदाज न करें
•पार्टनर को समय-समय पर खास महसूस कराएं
उनका मानना है कि जब लोग खुलकर अपनी भावनाएं साझा करते हैं, तो रिश्तों में नई ऊर्जा आती है और दूरियां कम होती हैं।
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निष्कर्ष
आज के समय में जहां रिश्ते अक्सर गलतफहमियों और कम्युनिकेशन गैप की वजह से टूटते हैं, वहां जया किशोरी की यह सलाह एक सरल लेकिन प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती है।
स्पष्ट संदेश:
रिश्ते शब्दों, भावनाओं और निरंतर प्रयासों से बनते हैं—सिर्फ एहसास से नहीं।


