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गैस संकट: राजस्थान में रेस्टोरेंट बंद होने की नौबत, कर्मचारियों को घर भेजना पड़ा; गांवों में 45 दिन तक घरेलू सिलेंडर की बुकिंग नहीं — सड़क पर चूल्हा जलाकर लोगों का विरोध

राजस्थान के कई जिलों में एलपीजी सिलेंडर की कमी ने अब गंभीर रूप ले लिया है। गैस की आपूर्ति में लगातार आ रही बाधाओं के कारण होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को अपने प्रतिष्ठान अस्थायी रूप से बंद करने पड़ रहे हैं। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कई जगहों पर रसोई गैस उपलब्ध न होने के कारण व्यापारियों को कर्मचारियों को छुट्टी देकर घर भेजना पड़ा। इससे न केवल छोटे व्यापार प्रभावित हुए हैं, बल्कि सैकड़ों कर्मचारियों की रोज़ी-रोटी पर भी संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। कई गांवों में घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के लिए लोगों को लगभग 40 से 45 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। समय पर सिलेंडर न मिलने के कारण ग्रामीण परिवारों को मजबूरन लकड़ी और पारंपरिक चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से कठिन हो गई है, क्योंकि रसोई का काम फिर से पुराने तरीकों पर निर्भर होने लगा है।

गैस आपूर्ति में हो रही इस देरी के खिलाफ कई स्थानों पर लोगों ने अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया। शहरों और कस्बों में नागरिकों और व्यापारियों ने सड़कों पर चूल्हा जलाकर प्रदर्शन किया और प्रशासन से तत्काल आपूर्ति बहाल करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आम जनता के साथ-साथ छोटे व्यवसाय भी भारी नुकसान झेलेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि गैस वितरण व्यवस्था में आ रही बाधाएं, मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ता अंतर, तथा लॉजिस्टिक प्रबंधन की समस्याएं इस संकट के प्रमुख कारण हो सकते हैं। ऐसे में राज्य और संबंधित एजेंसियों के लिए यह आवश्यक हो गया है कि आपूर्ति श्रृंखला को तुरंत मजबूत किया जाए, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को समय पर गैस उपलब्ध हो सके।

फिलहाल जनता और व्यापार जगत की नजरें प्रशासनिक कदमों पर टिकी हैं। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो यह संकट राज्य के छोटे व्यवसायों, श्रमिकों और ग्रामीण परिवारों के लिए और भी गंभीर आर्थिक तथा सामाजिक समस्या बन सकता है।